41 Views

*मेरे सद्गुरु आण्णा !!*
✍️ २४१७

मेरे आण्णा के सानिध्य में
परम शांती का भंडार था
अन्न , वस्र्त ,निवारा ,धन ,
वैभव है या नही इसकी कोई
चिंता नही थी !
मस्त , आनंदी जीवन था !
साक्षात स्वर्ग !
साक्षात स्वर्गीय आनंद !
आण्णा के रूप में
साक्षात ईश्वर ही मेरे
साथ था !
निरंतर !
जन्मजन्मातर से लेकर
जन्मजन्मातर तक यह
दिव्य प्रेम , यह दिव्य
शांती का भंडार
अबाधित है !
मेरे सद्गुरू आण्णा का
साकार – निराकार का सहवास
अबाधित है !

सद्गुरू कृपा और ईश्वरी कृपा का सर्वोच्च वरदान तो यही है !
और क्या चाहिए ?

हरी ओम्

*विनोदकुमार महाजन*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!