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*आर्थिक विकास और* *आत्मिक* *विकास…*
✍️ २७९१

_विनोदकुमार_ _महाजन_
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आर्थिक विकास भौतिक सुखों को दर्शाता है !
तो आत्मिक विकास आध्यात्मिक उंचाईयों तक ले जाता है !

अभी के समय में आर्थिक विकास तो हो रहा है , मतलब इंन्सान धन से अमीर तो बन रहा है !
मगर क्या सामुहिक सामाजिक तौर पर आत्मिक विकास हो रहा है ? आर्थिक संपन्नता तो आ रही है मगर मन की गरीबी बहुत ही बढ रही है !
क्योंकी संकुचित विचार सरनी इसमें प्रबल होती जा रही है !

आर्थिक विकास उच्च कोटी की जीवनशैली तथा सुख लोलूप , भोग विलासी जीवन बनाने में सहाय्यभूत होती है !
मगर आत्मिक विकास नहीं हुवा तो कितना भी धन वैभव होने पर भी मन को शांत और प्रसन्नचित्त नहीं रख सकता है !

मन को शांत , संयमीत रखने के लिये आत्मिक विकास महत्वपूर्ण होता है !

इसिलिए समाज में आज लोग धन से अमीर तो बन रहे है मगर मन से भिकारी , कंगाल बनते जा रहे है !

क्योंकी धन के लालच के कारण मन की शांती ही खो बैठी हैं !

आर्थिक विकास में उपरी दिखावा जरूर होता है !
मगर राजमहल भी मन को शांत करेगा इसका कोई भरौसा नहीं होता है !
मगर आत्मिक विकास में उपरी दिखावे की जरूरत ही नहीं होती है !
एक टूटी फूटी झोपडी भी मन को शांत रख सकती है !

आर्थिक विकास आध्यात्मिक उंचाईयों को पहुंचाने में शायद महत्वपूर्ण नहीं हो सकेगा !
मगर आत्मिक विकास आध्यात्मिक उंचाईयों तक ले जाने में सहाय्यक होता है !

आज का सामाजिक विदारक चित्र यही दर्शाता है की , आर्थिक विकास तो हो रहा है मगर आत्मिक विकास न होने के कारण मन की बेचैनी , अशांतता और सामाजिक उद्रेक तथा कलह तेजी से बढ रहा है !

और मन की बेचैनी सामाजिक उद्रेक निर्माण करता है और समाज मन को स्फोटक परिस्थिती में ले जाने में सहाय्यक होता है !

इसिलिए मन की शांती के लिये हर घर में और हर एक व्यक्ती को आत्मिक विकास की ओर ले जाने के लिये ऐसा वातावरण , माहौल निर्माण होना जरूरी है !

आत्मिक विकास उच्च कोटी का वैराग्य प्रदान करने के लिये सहाय्यभूत होता है !

और हमारे सनातन हिंदू संस्कृती में मठ मंदिरों का निर्माण भी इसी महान उद्देश से बनाया गया है !

साधारणतः आध्यात्म से जुडा हुवा व्यक्ती अथवा समाज आत्मिक विकास की ओर निरंतर अग्रेसर रहता है !
और जहाँ आत्मिक विकास द्वारा मन की शांती को साधा जाता है वह व्यक्ती , वह समाज मानसिक संतुलन की ओर बढकर , अपने जीवन में अनेक उंचाईयों तक पहुंच सकता है !

ईशत्व प्राप्त करने के लिये अथवा नर का नारायण तथा नारी की नारायणी बनाने के लिये , आर्थिक विकास काम नहीं आयेगा मगर आत्मिक विकास जरूर काम आयेगा !

क्योंकी आर्थिक विकास आध्यात्म से जोडने में सहाय्यक नहीं हो सकेगा मगर आत्मिक विकास सौ प्रतिशत आध्यात्मिक विकास की ओर ले जायेगा जो…
आत्मा परमात्मा की सच्ची पहचान तथा नई उंचाईयों तक ले जाकर ,
ईशत्व प्राप्त करने में सहाय्यभूत होगा !

आत्मा परमात्मा का मिलन यही सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के लिये , आत्मिक विकास बहुत जरूरी होता है !

इसिलिए हर एक व्यक्ती को आर्थिक विकास तो चाहिए ही , इसके सिवाय आत्मिक विकास भी जरूरी है !

और सच्चा आत्मिक विकास केवल सनातन धर्म ही सिखाता है !
और सनातन धर्म में दोनों का विकास करना भी संभव है !

इसिलिए उन्नत जीवन के लिये सनातन धर्म की आदर्श आचरण पध्दती तथा जीवन पध्दती ही स्वयंपूर्ण तथा संपूर्ण जीवन की ओर ले जाती है !

*जय सनातन*

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