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*समझौता गमों से* *करलो…!!*
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जब तुम दुखों में भी
हॅंसना सिखोगे ?
तब समझ लेना तुमने,
जीना सीख लीया है !
गमों में भी तुम मुस्कुराना सिखोगे ?
तब समझ लेना की ,
जीवन की लडाई तुमने जीत ली है !
रोते हुए तो सब आते है ,
खुद का रोना और दुखदर्द जीवन भर के लिये भूलकर ,
हॅंसाना सिख लिया ?
तो समझो तुम्हे जीना आ गया !

एक समय आयेगा जब तुम्हे जींदगी शांत रहना सिखायेगी ,
सब लोगों को सुनना तुम पसंद करोगे , वह दिन तुम्हारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण रहेगा और वही दिन से तुम्हारी जींदगी बदल जायेगी !

ना किसीसे कुछ बोलना
ना कुछ बाते करना , ना किसीसे बहस करना , खामोशी से सबकुछ सुनते रहना , सहते रहना ही , जींदगी तुम्हे सबकुछ सिखा देगी और… जीवन का सही अर्थ भी बता देगी !

दुनिया बडी जालीम है ,
जालीम दुनिया में , विश्वास किसपर और कैसे करें ? यह समझकर भी तुम ?
मौन , शांत रहोगे…
हॅंसते हॅंसते जीना सीख लोगे तो ?
समझ लेना ?
तुम जीना सीख गये हो..

खुशिया बाॅंटने पर भी अगर तुम्हे जहर ही मिलता है और ? वही जालीम जहर हजम करके तुम ?
बडे खुशी से और आनंद से जी रहे हो तो ?
समझ लेना तुम जीना सीख गये हो…!

जालीम दुनियादारी का सही अर्थ समझकर भी तुम ?
उच्चतम स्वर्गीय सुख में ? आनंद में निरंतर नहा रहे हो…? तो ??
समझ लेना तुम जीना सीख गये हो…!

दुखदर्द में भी सिने पे पत्थर रखकर , हॅंसना तुमने सीख लिया , तो समझो ? उसी दिन जीना तुमने सीख लिया…!

समझौता ? इंन्सानों से नहीं … समझौता गमों से करलो…!

*राधेश्याम*

*विनोदकुमार महाजन*

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