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*नियती नशीब और* *प्रारब्ध !*
✍️ २८८३
*विनोदकुमार महाजन*
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हर एक सजीव प्राणी अपना खुद का प्रारब्ध लेकर ही पैदा होता है !
हर एक का प्रारब्ध अलग , हर एक का नशीब अलग ! और ?
हर एक की ललाट रेखा अलग और हर एक की हस्तरेखा भी अलग अलग !
मगर किसीके प्रारब्ध में नियती हस्तक्षेप नहीं करती है !
नियती के अनुसार जो घटीत घटना होती है ?
वह होती ही रहती है !
और सब नियती के अधिन ही होते है !
सबका प्रारब्ध , सबका नशीब और उसका पूरा लेखा जोखा भी नियती के अधिन ही होता है !
स्वयं ईश्वर भी नियती की रचना में हस्तक्षेप नहीं करते है !
जो जैसी घटनाएं घटनी है ? उसे ईश्वर भी नहीं रोक सकता है !
होनी को कौन और कैसे टाल सकता है ?
हर एक के जीवन में ?
नियती कुछ अलग ही खेला करती है , उसके नशीब में अलग ही कुछ होता है और ? उसका प्रारब्ध कहीं ओर ले जाता है ?
वह पश्चिम बंगाल में ?
” *खेला होबे* ” वाली आपको याद होगी ?
राम नाम से सख्त नफरत करने वाली ?
निकली थी…खेला होबे…करने और उसके नशीब और प्रारब्ध ने ?
कुछ अलग ही खेला कर दिखाया !
यही होती है नियती !
हर एक आदमी सोचता एक है और ? होता कुछ दूसरा ही !
इंन्सान जाना चाहता है कही ओर और ? उसका नशीब खींच लेता है कहीं ओर ?
दुख किसको चाहिए ?
किसी को भी नहीं चाहिए !
मगर होता क्या है ?
जैसे जैसे सुखों की अपेक्षाएं बढती जाती है ? नशीब में कुछ अलग ही होता रहता है !
फिर वह इंन्सान सोचता रहता है…
” मैं करना यह चाहता था ? मगर कुछ अलग ही कैसे हो गया ? ”
सबकुछ उल्टापुल्टा ?
यही तो नशीब है प्यारे !
जो तुने पिछले जनम में कर्म किए है वहीं प्रारब्ध बनकर तेरा पिछा कर रहे है !
वह कैसे पिछा छोडेंगे ?
इसमें नियती का क्या दोष है ?
बाकी चौ-याशी लक्ष योनी तो ? अपना जीवन चक्र चलाकर , कर्मभोग तो भोग ही रहे है !
उनके हाथ में कुछ भी नहीं है !
पैदा हो गया और ? मर गया !
मगर ? सृष्टी रचियेता ईश्वर ने मनुष्य प्राणी को बुध्दी का वरदान दिया है ! उसके आधार पर ?
सही क्या ? गलत क्या ?
इसपर मंथन करके ? चींतन करके , भटका हुवा कर्म का रास्ता भी बदल सकता है और ?
सदसद्विवेकबुद्धी से निर्णय लेकर , सत् कर्म करके अपना नशीब भी बदल सकता है !
और जब तुम सत्कर्म का रास्ता चुनते हो…? तब धिरे धिरे तुम्हारा नशीब भी बदल सकता है और ? दुखों के दिन परम सुखों में परिवर्तीत होने लगते है !
इसिलिए हमेशा दूसरों का भला सोचो…इससे तुम्हारा दुखदर्द भी हलका होगा…तुम्हें ईश्वर और नियती भी सहायता करेंगे… और ?
तुम्हारा संपूर्ण जीवन ही केवल बदल ही नहीं जायेगा तो ? संपूर्ण जीवन ही प्रकाशमान भी बनेगा !
और दूसरे दुखदर्द के पिडित लोगों को तुम सुखों का रास्ता और दिव्य प्रकाश भी दिखायेंगे !
इसिलिए ?
खुद को प्रकाशमान बनाना होगा !
तभी तुम्हारा दिव्य प्रकाश चारों ओर ?
विना सायास ही फैल जायेगा !
*हरी ओम्*
*जय हरी विठ्ठल*
🙏🕉️🚩🩷