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*क्या ? तुम्हारे अंदर आग* *है ??*
✍️ २८३९

*विनोदकुमार महाजन*

🔥🔥🔥🔥

मेरे प्यारे भारत देश वासियों ?
क्या तुम्हारे अंदर सचमुच में आग है ??

देशप्रेम की आग , ज्वाला , लाव्हा तुम्हारे अंदर है ?
अन्याय अत्याचार के विरूद्ध तुम्हारे अंदर आग है ??

अगर अंदर आग नहीं है तो? देशप्रेम की यह आग फिरसे जलानी होगी !
जलानी ही है…
एक नया इतिहास बनाने के लिये…

*क्यों ??*
क्योंकी जरा सोचना तो होगा ही….

हमारे शूर वीर राजे संभाजी को तडपातडपाकर हैवानों ने मारा …
हमारे राजा शिवछत्रपती को अनेक नरकयातनाएं दी गई …
हमारे महाराणा प्रताप को भयंकर तडपाया …
हमारे पृथ्वीराज चौहान को धोके से मारा …
हमारे गुरू गोविंदसिंग को और उनके परिवार को क्रूर हैवानों ने तडपातडपाकर मारा…

और भी ऐसे अनेक महात्माओं को , महापुरूषों को जिन्होंने तडपातडपाकर मारा…याद करो उनकी शहादत… और ?
याद करो उन क्रूर अत्याचारी हैवानों को , सैतानों को , भयावह राक्षसों को ?
जिन्होंने हमारे छोटे छोटे मासूम बच्चों को भी ?
जींदा जलाया , निष्पाप जीवों को भी तडपातडपाकर मारा , उनका छोटासा शरीर भी क्रूरता से चीर डाला ??

*क्या ?*
ऐसे भयानक जालिमों को हम माफ करेंगे ?

ऐसे भयावह अत्याचारीयों के नाम आज भी हमारे गली , गांव , नगर , शहर को दिये गये है ?
और हम मूक दर्शक बनकर , तेजोहीन बनकर यह सब तमाशा खुलेआम देख रहे है ??
क्यों ??

हमारा आत्मसन्मान , हमारा आत्मतेज कहाॅं गायब हो गया है…?

या फिर हमारे अंदर खून है भी या नहीं ? हमारे अंदर आग है भी या नहीं ?
हमारे अंदर का धधगता ईश्वरी तेज , हमारे अंदर की प्रतिशोध की धधगती ज्वाला मर मर गई है क्या ?

साथीयों ,
अब हमें हीन दीन लाचार नहीं रहना है बल्की ? अंदर का धधगता ईश्वरी तेज जगाना है , अंदर की आग जलानी है…
और…?
अत्याचारीयों के नामोनिशाण सदा के लिये मिटाने है !

सोचो , गौर से सोचो…
हमारे महादेव…देवों के भी देव…
उच्च कोटी का हमारा श्रध्दास्थान…
साक्षात महादेव का वास्तव्य स्थान ?
*मान सरोवर ?*
खुद के बाप की जागीर समझकर ? दूसरे देश को जानबूझकर देने वाला कौन था…?किसने दिया यह हमारा आदर्श श्रध्दास्थान दूसरों को ?

*किसने दिया ?*
*क्यों दिया ?*
*किसके अधिकार पर* *दिया ?*

हमारा आत्मसन्मान मारने के लिये …?
हमारे श्रध्दास्थानों को नामशेष करने के लिये ?
हमारे आदर्श ईश्वरी सिद्धांत मिटाने के लिये ?
हमारे ही नाक के उपर ?
हमारा *मान सरोवर* दूसरों को दिया ?

*आखिर किसने और* *क्यों ?*

और हम ? लाचार बनकर हीन दीन बनकर यह भयावह अत्याचार सहते रहे ??

भयंकर क्रूर तथा अत्याचारी, षड्यंत्रकारी लोगों को ही हम आज तक सर्वोच्च सत्तास्थान पर बिढाते रहे ??

*आश्चर्य है ना ?*

इतने मुर्ख या निद्रिस्त रहे हम ?
जो हमारा नामोनिशाण मिटाना चाहता है , जो हमारे मठ मंदिर तथा हमारी आदर्श संस्कृती जमीन के निचे सदा के लिये दफनाना चाहता है ?
उसे ही हम सर्वोच्च सत्तास्थान पर ? लगातार ? बिठाते आ रहे है ?

*शर्म करो…शर्म करो…*

अभी भी समय हाथ में है…अभी भी नींद से जागो…
अंदर की आग जागृत करो…

*धर्म के लिये,*

*हमारे देवता तूल्य* *आदर्श ,*
शेर शिवाजी , शेर संभाजी जैसे शुरों जैसों का समर्पित जीवन जीना ,
अत्याचार के विरूद्ध सदैव धधगती आग , तेज जागृत रखना ही ?हमारा …हम सभी भारतवासियों का… असली जीवन होता है…
और यही हमारे जीवन का उद्दीष्ट भी होना चाहिए…

जागो हिंदू जागो…
जागो शूर विरों जागो..
जागो तेजस्वी ईश्वर पूत्रों जागो…

अधर्म का अंधियारा हटाना है…
धर्म का उजाला लाना है…

*भगवान के भगवे का* *राज ? चारों ओर* *बढाना है…*
*हिंदवी स्वराज्य*
संपूर्ण विश्व में फैलाना है…

सत्य सनातन धर्म की त्रिवार जयजयकार हो…

*हर हर महादेव*
*राजा शिवछत्रपती की* *जय*

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