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*हिंदू ? षड्यंत्रों का* *शिकार… ??*
✍️ २८५१
*विनोदकुमार महाजन*
🚩🚩🚩🚩
*हिंदू…*
इतिहास के पन्नों में एक परिपूर्ण तथा तेजस्वी समाज के रूप में गौरवान्वीत किया जाता है…!
ऐसे तेजस्वी , परोपकारी समाज को सदीयों से , एक भयावह षड्यंत्रों द्वारा , कुछ ( ?? ) आक्रमणकारीयों ने , नामशेष करने की , आदर्श हिंदू संस्कृती को नेस्तनाबूत करने की , संपूर्णतः तबाह , बरबाद करने की अनेक योजनाएं बनायी गयी !
*अनेक लुटारू* और आक्रमणकारी इस देश में आये , देश का अपरीमीत धन वैभव भी लूटा , देश पर अनेक सालों तक राज भी किया और…?
सबसे भयानक कार्य यह किया की ,
यहाँ की आदर्श हिंदू सनातन संस्कृती को , आदर्श जीवन पध्दती को , जमीन में गाडने की , संपूर्णतः तबाह करने की , नामशेष करने की , यहाँ अनेक षड्यंत्रकारीयों द्वारा हमेशा के लिये , जमीन के निचे की यशस्वी योजनाएं बनायी गयी …
परिणाम स्वरूप आज भी अनेक जगहों पर ??
हिंदू समाज , घोर नारकिय जीवन जीने के लिये , मजबूर हुवा है !
सबसे पहले हिंदू संस्कृती नामशेष करने के लिये , उसके , हिंदुओं के , आत्मविश्वास पर हमले किए गये !
उसके आदर्श श्रद्धास्थानों पर हमले करके , उन्हे नामशेष करने की , कुटील योजनाएं बनायी गयी !
धीरे धीरे हमारा अपना अनेक भू प्रदेश ऐसे आसुरी आक्रमणकारीयों ने अपने कब्जे में कर लिया…जो ? आज भी उन ? आसुरीक शक्तियों के हाथ में वही भू प्रदेश कब्जे में है…
और हम ?
उसके मूक दर्शक साक्षीदार है…!
वैभवशाली हिंदू समाज को हीन दीन लाचार बनाने के लिये , आसुरीक शक्तियों द्वारा, अनेक विनाशकारी चक्रव्यूह बनाये गये !
और हमारे समाज को ऐसे चक्रव्यूह में धीरे धीरे फॅंसाया गया ?
या फिर ?
मजबूरन लटकाया गया ??
इसमें सबसे पहले… ऐसे आदर्श संस्कृती का आचरण करनेवाले को , तन मन धन से संपूर्णतः उध्वस्त करने के लिये, उसको , उसकी आदर्श संस्कृती को समाप्त करने के लिये , अनेक मंदिरों पर हमले करके , उसे नष्ट करके ,
उसी जगहों पर , अ – सनातन और अ – सभ्य संस्कृती को हमपर जबरन थोंपने का प्रयास किया गया जो ? आज भी एक कलंक के रूप में हमपर लाद दिया गया है …
जो हमारे जैसे राष्ट्र प्रमीयों को , हमेशा के लिये , हतोत्साहीत तथा दुखी करता रहता है !
और ?
दुर्देव से ? हमारे ही अनेक सिधेसाधे और भोलेभाले लोग…?
*उसी अ धर्मी जगहोंपर जाकर*
अपनी मनोकामनाएं पुरी करने के लिये ? निरंतर प्रार्थना करते रहते है ???
कितना भयंकर सामाजिक अंध:पतन और दैव दुर्विलास हो गया है हमारे आदर्श और सुसंस्कृत समाज का…जो…?
कंगाल , हताश बनकर ? आक्रमणकारीयों को और उनके सिध्दांतों को पूजने लगा है ?
सभी जगहों पर ईश्वर जरूर है और सभी में ईशतत्व मौजूद भी होता है , यह धारणा अच्छी भी है और हमें मंजूर भी है …
*मगर ?*
क्या हमें और हमारे संस्कृती को नामशेष करने का सदैव सपना देखने वाले और क्रूर भयानक अत्याचारी हमारे आदर्श हो सकते है ?
और हमें ऐसे स्थान पूजनीय हो सकते हैं…??
जिन्होंने हमें भयंकर बरबरता से कुचलने का लगातार प्रयास किया ?
मुगलशाही , निजामशाही , आदिलशाही, कुतुबशाही जैसे क्रूर उन्मादीयों ने हमारे देश पर केवल राज ही नहीं किया बल्की हमारा अस्तित्व मिटाने का ही भरसक और लगातार प्रयास किया गया !
डच, फ्रेंच, , पोर्तुगीज इंग्रज जैसे अनेक आक्रमणकारीयों ने भी हमारी संस्कृती तबाह करने की लगातार कोशिश की !
*और दुर्देव से आजादी के बाद* भी ? ( आज भी…? दुर्देव से हमारे वह आदर्श है ?? )
कुछ लोग ( ??? )
*आधुनिक संत* के नाम पर ?
*आधुनिक शुक्राचार्य* बनकर , हमारी संस्कृती को नेस्तनाबूत करने का गुप्त तरीका अपनाते रहे ?
और ऐसा प्रयास आजादी के बाद भी लगातार आज तक भी ?किया गया…??
*जो भयावह षड्यंत्रों से* *भी महाभयंकर था !*
और हमारे सिधेसाधे , भोलेभाले लोग , अनायासे ही उस भयंकर जाल में , विनाशकारी चक्रव्यूह में?
फॅंस गये…जिन्होंने गुप्त रूप से आसुरीक शक्तियों को बढावा देने का निरंतर और गुप्त कार्य किया !?
और हमारा समाज आज भी ? ऐसे ही कुटील षड्यंत्रकारी को संत मानकर पूजता है ?
और विशेष बात यह है की , उस संत को कोई भला बुरा बोलता है , उसकी सच्चाई उजागर करता है , उसके विरूद्ध कोई सत्य बोलता है तो ??
तो ? उस व्यक्ती को ?तत्काल *गुनहगार* के पिंजरे में खडा किया जाता है ?
और उल्टा उसे ही आजीवन अपराधी बनाया जाता है ?
और हिंदू समाज भी इसे सत्य मानता है ?
*सत्यपूजक हिंदू* *समाज ?*
*महान संत ? महात्मा ??* को ही भगवान मानता है ?
*मतलब ?*
सत्यमेव जयते के देश में ? सचमुच में सत्य बोलना भी गुनाह है या फिर सत्य बोलना , सत्याचरण करना भी पाप या अपराध हो गया है ?
वास्तव में ? इस देश में ?
*असली नायक*
बनाये गये… *खलनायक*
और ?
असली *खलनायक*
बन बैठे *नायक ??*
[ *अनेक घरों में भी* ? लगभग आज की स्थिती भी ? लगभग ठीक ऐसी ही है ?
*समझने वालों को* इषारा भी काफी है…! ]
सबकुछ उल्टा पुल्टा हो गया…इस देश में ?
सत्य को और सत्य सनातन को गहरे षड्यंत्रों से केवल बदनाम ही नहीं किया गया बल्की संपूर्णतः बरबाद करने का…
जालीम माहौल बनाया गया…?
और मेरा हतबल , हताश समाज ?
इस जाल में बूरी तरह से फॅंस गया ?
या फिर जानबूझकर फॅंसाया गया ?
जो आज भी उभर नहीं रहा है ??
*कितनी गहरी निद्रा में* है हमारा समाज ? जो अनेक सालों तक, सत्य तक भी नहीं पहूंच सकता है ?
असली नायक कौन ? और असली खलनायक कौन ?
यह भी पहचान नहीं सकता है ?
*और दुर्देव से* ?
जो सत्य बताने की , सत्य बोलने की कोशिश भी करता है…उसे ही उल्टा ? *कठोर दंडीत* किया जाता है ??
उसे ही गुनहगार साबीत करके , भयंकर षड्यंत्रों द्वारा संपूर्णतः तबाह किया जाता है…??
*इस देश में ??*
आश्चर्य ही आश्चर्य है ना सबकुछ *साथीयों ?*
और इसकी अंतिम काट भी सामने दिखाई नहीं देती है ?
आजादी के असली महानायक भी अलग रहे और ? फल ? दूसरे ही कोई उठा के ले गये ?
और हमारा समाज आज भी गहन निद्रा में है ??
अनेक सालों तक तो यह सिलसिला लगातार जारी था ? जिन्होंने हमें अनेक और भयंकर विनाशकारी षड्यंत्रों से नामशेष करने का लगातार प्रयास जारी रखा ?
उसी को ही हम ? हमारा सिधासाधा समाज ? आज तक… *सर्वोच्च सत्तास्थान* पर लगातार ? अनेक सालों तक ?
बिठाता रहा ?
और उपर से अंदर ही अंदर बरबाद भी होता रहा ?
*आश्चर्य है ना ?*
विनाशकारी जहरीले साॅंपों को ही देवता मानकर , उन्हे ही पूजकर , जिन्होंने हमारे ही संपूर्ण तबाही का सपना देखा था ? उसे ही हम देवदूत समझ बैठे थे ?
आज भी बैठे हुए है…?
*आसुरें के गुरू…* आधुनिक शुक्राचार्य को…??
हम नहीं पहचान सकें ?
और अगर ,
सावधान होकर कोई , ऐसी भयावह विनाशकारी निती को जो भी विरोध करता था ?
उसे ही नामशेष किया जाता था ? उसका ही नामोनिशाण मिटाया जाता था ?
और लगभग आज भी अनेक जगहों पर ठीक ऐसा ही प्रयास लगातार जारी है ?
दमनचक्र और दमनकारी निती द्वारा हमारे आदर्श सिध्दांतों को , आदर्श संस्कृती को कुचलने का लगातार प्रयास किया गया यहाँ पर !?
आज भी किया जा रहा है !
और ? हमारे ही कुछ नतद्रष्ट लोग ?
इसका साथ देते रहते है ?
जहाँ इस देश में, सत्य बोलना आज भी लगभग असंभव है वहाॅं ? *सत्यमेव जयते* कैसे हो सकता है ?
सच तो यह है की, आज भी इस देश में…?
अनेक योग्यता पूर्ण व्यक्तीयों को *जानबूझकर* अपमानित किया जाता है , प्रताडित किया जाता है…
और ? जिसकी योग्यता नहीं है , अथवा शून्य है ? योग्यता ही नहीं है ?
वह ? सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकता है ?
और यह सत्य बोलना , ऐसा कहना भी अपराध की श्रेणी में गीना जाता है तो ?
यह कैसा लोकतंत्र भी है ?
*समस्या गहन है !*
ऐसा भयंकर षड्यंत्र और अनाकलनीय,
सबकुछ कौन और कैसे बदलेगा ? यह भी अनुत्तरीत है…??
ऐसा कहते है की…
” *ईश्वर के घर में देर है* *मगर अंधेर नहीं* *है…”*
मगर यहाँ तो हरदिन ?
सत्य तडपकर मर रहा है तो ?
ईश्वर भी कब और कैसे न्याय देगा ?
यह तो समय ही बतायेगा…!
मगर एक बात भी सत्य है की…
अन्याय और अत्याचार की जब परीसीमा होती है… *तब…?*
क्रांती होती है…
जहाँ सत्य बोलना अथवा सत्य आचरण करना भी गुनाह अथवा अपराध समझा जाता है तब…?
अ – सत्य वादीयों के ?
बूरे दिन जल्दी ही आरंभ होने वाले है…
ऐसा ही समझा जाना चाहिए !
घना अंधेरा जादा समय तक नहीं रूक सकता है…
ठीक ऐसे ही…
अधर्म का अंधियारा भी जादा दिन नहीं रूकने वाला है…
एक दिन निश्चित ही सत्य का सुर्योदय होकर ही रहता है…
*और वह दिन…?*
सत्य सनातन धर्म के वैश्विक जीत का ही दिन होगा…
सत्य ? परेशान जरूर हो सकता है… मगर पराभूत नहीं…!
कभी भी नहीं !
*विश्वास रखिए…*
*क्योंकी ?*
सत्य की आवाज कोई भी और कभी भी नहीं दबा सकता है…!
सत्य को जमीन में गाड भी दिया तो भी ?
सौ प्रतिशत शक्ती से , उपरी छलांग लगाकर , सत्य तो ? उपर उठकर आता ही है !
फिर चाहे उसे कोई कितना भी निचे दबाने का प्रयास करें !
*यही अंतिम सत्य भी है…!!*
और इसी सिध्दांतों के अनुसार , संपूर्ण धरती पर , जमीन के गाडे हुए सभी सत्य सनातन के आदर्श सिध्दांत भी एक दिन , बहुत ही शक्ती से और तेजी से , उपर उठकर आयेंगे ही आयेंगे !
और ?
यह दिन भी ?
दूर नहीं है !!
संपूर्ण धरती पर , फिरसे मंदिरों में आरतीयों की , मंगल ध्वनी सुनायी देगी…
यह त्रिकालाबाधित सत्य भी है…!!
यह आशावाद नहीं बल्की वास्तव है !
*ईश्वर निर्मित सत्य* *सनातन धर्म की जय* *हो…*
*भगवान श्रीकृष्ण की* *जय !!*
🚩🚩🚩🚩
