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पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और सभी धर्म योध्दाओं के लिए…
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पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और उन जैसे महान धर्मयोद्धा, अपनी जान जोखिम में डालकर, दिनरात धर्मजागृति अभियान चला रहे है।जी तोड मेहनत कर रहे है।प्रयास कर रहे है।
ऐसे अनेक धर्म योध्दा प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से,दृश्य – अदृश्य रहकर धर्मजागरण का कार्य अहर्निश कर रहे है।
साधनों का अभाव होकर भी,परिणामों की चिंता किए बगैर, एकेक पल राष्ट्रहित के लिए प्रयास रत है।

मगर कितने प्रतिशत हमारे लोग जागते है ? यह संशोधन का विषय है।

मुगल, अंग्रेज जैसे आक्रमणकारी,लुटेरों की गुलामी करने की आदत सी हमारे समाज को लगी है क्या ?
हमारे खून में ही गुलामी बस गई है क्या ?
धर्म अभियान में बढचढकर सहभाग लेकर, धर्म योध्दाओं का आत्मबल बढाने के लिए कितने प्रतिशत लोग आगे आ रहे है ?

हमारे ही लोग साधुसंतों को बदनाम करने में धन्यता मानते है।उन्हें दुखदर्द, पिडा,यातनाएं देते है।
और मदर तेरेसा को सरपर लेकर नाचते है।

मोदिजी, योगिबाबा,अमीत शाह जैसे धर्म योध्दे भी सत्ता में रहकर भी समाजपरिवर्तन द्वारा ,क्रांती की लहर लाने का प्रयास करते है,दिनरात मेहनत करते है…

और हमारे ही लोग फ्री के लालच में आकर,दिल्ली – पंजाब में गलत निर्णय लेते है।और सत्य का और धर्म का साथ देने के बजाए, अधर्मीयों से साँठगाँठ करते है।
पश्चिम बंगाल में,राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे कुछ प्रदेशों में हमारे ही लोग गलत लोगों को सत्ता पर बिठाकर, खुद का सर्वनाश कर देते है।

तो यह भयावह दृष्य देखकर आत्मक्लेश तो होगा ही ना ?

और हिंदुओं की ऐसी भयंकर बिमारी का कुछ इलाज भी नहीं है।कश्मीर घटना होने के बाद भी…अगर आज भी हमारा समाज जागृत नहीं होता है…
तो….धर्म रक्षा के लिए कौन आगे आयेगा ?

पश्चिम बंगाल, केरल में हमारे लोगों का भयंकर रक्तपात हो रहा है,या किया जा रहा है,और फिर भी हमारे ही लोग आँखें बंद करके जी रहे है।

हमारे देवीदेवताओं को बदनाम करनेवालों को सबक सिखाने के बजाए, हमारे ही लोग देवीदेवताओं को बदनाम करनेवालों का साथ दे रहे है…
तो ? ऐसे लोगों से हमें कौन बचायेगा ?
भगवान भी ऐसे नतदृष्ट लोगों से दूर भाग जायेगा।क्योंकि मानवी देह धारण करके ,सभी के कल्याण के लिए,अगर ईश्वर भी आयेगा,तो हमारे ही लोग ईश्वर को भी भगाएंगे।

ख्रिश्चन, मुस्लिम, बौध्द धर्म में लगभग एक भी व्यक्ति अपने धर्म के विरुद्ध एक शब्द भी नही बोलता है।
और हमारे धर्म में ?

एक फोन काँल पर हजारों की भीड जमा करनेवालों के सामने, हमारा समाज कहाँ है ?
एक फोन काँल पर हमारे कितने लोग जमा होते है ?
सामने हमारे ही भाईयों पर भयंकर अत्याचार हो रहा है…तो…उस बेचारे को न्याय देने के सिवाय, हमारे ही लोग अनदेखी करते है,अथवा दूर भागते है तो…
ऐसे भयंकर, भयावह बिमारी का इलाज भी क्या है ?

ठंडा खून।

आज भी राष्ट्रद्रोहियों की फिल्में,बहुमात्रा में आनंद से देखी जाती है,अथवा देखी जाएगी, और आज भी युवा पीढ़ी के आदर्श ऐसे राष्ट्रद्रोही फिल्मों के कलाकार होंगे,और फिल्मों का वह पैसा भी हमारे ही विध्वंस के लिए, पाकिस्तान भेजा जाएगा… तो…इससे भयंकर बडा दुर्देव कौनसा होगा ?

कौन सँवारेगा ऐसे समाज को?
राष्ट्रद्रोहियों का जमकर विरोध, बहिष्कार करने के बजाए, उनको ही गले लगाया जाएगा, तो ऐसे मानसिक बीमारी का इलाज भी क्या है आखिर ?

उत्तर जरूर देना साथियों।
उत्तर आप सभी को ही देना है।
सोये हुए को जगाना आसान है,मगर मरे हुए को जींदा करना कैसे संभव है ?

और ऐसे समाज को कौन नवीसंजीवनी देकर जींदा करेगा ?और ऐसे समाज में रहकर, आत्मक्लेश के सिवाय मिलेगा भी क्या ?

कितने ही दूर भागेंगे तो हर जगहों पर ऐसा ही मुर्दाड मन का समाज देखेंगे तो…?
आखिर इसका ईलाज क्या ?

लेख लिखने का उद्देश्य यही है की,पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जैसे महान धर्म योध्दाओं को संपूर्ण सहयोग प्राप्त हो।

मैं खुद मुर्दाड मन के समाज को नवचेतना ,नवसंजीवनी देने का निरंतर प्रयास हजारों लेखों द्वारा कर रहा हुं।मगर अपेक्षित परिणाम नही मिल रहे है।
मैं अब तेजस्वी समाज निर्माण के लिए, एक शक्तिशाली जनआंदोलन खडा कर रहा हुं।
देखते है कितने साथ देते है,कितने दूर से तमाशा देखते है, कितने दूर भागते है,कितने गालियां देते है, कितने विघ्नसंतोषी बनते है।

निद्रीस्त,नौटंकीबाज, अधर्मी, कुधर्मी,विधर्मीयों का एक ही इलाज… नवसंजीवनी देकर हर एक की,विविधांगी मार्गों से आत्मचेतना जगाना।

साथ निभाएंगे तो भी बेहतर।
साथ ना भी देंगे तो भी बेहतर।

हरी ओम्
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विनोदकुमार महाजन

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