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कितना बदल गया इंन्सान ?
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चांद ना बदला,सूरज ना बदला
बदल गया इंन्सान
कितना बदल गया इंन्सान।
कितना बदल गया इंन्सान।

कुछ लोग मंदिर में जाते है।
भगवान को प्रार्थना करते है।
उसके सामने हाथ जोडते।
सुख के लिए प्रार्थना करते है।
धन की कामना करते है।

और अगर अकस्मात भगवान खुद रूप बदल कर सामने आता है….तो….?
उसको भी फँसाते है।
कैसे ?

एक दलाल का,कमीशन एजंट का उदाहरण लेते है।
भगवान के सामने वह दलाल मंदिर में जाकर प्रार्थना करेगा।

और अगर बाहर जाने के बाद अगर वही भगवान रूप बदल कर उसके सामने खडा होगा….
और कुछ व्यावहारिक बातें करेगा…तो….
वह अंधा इंन्सान….
सामने खडे होनेवाले भगवान से भी दलाली की ही भाषा बोलेगा
और कमीशन की माँग प्रत्यक्ष भगवान को भी करेगा।

कितना बदल गया इंन्सान ?
चांद ना बदला,सूरज ना बदला
बदल गया इंन्सान।
कितना अंधा बन गया इंन्सान ?

कितना बदल गया इंन्सान।

इससे तो साँप बिच्छू भी बेहतर होते है।
विनावजह के और ईश्वरी इच्छा के विरूद्ध वह तो अपना जहर भी नही उगलते है।
इंन्सानों से दूर भागते है।
और अगर मुसिबत दिखाई देती है तभी जहर उगलते है।

इसीलिए मराठी संत बहिणाबाई चौधरी भी कहती है…

साँप बिच्छू बरें…एवढा जहरीला इंन्सान।
हरी ओम्
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विनोदकुमार महाजन

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