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एक पवित्र एवं शांत क्षेत्र: –
सिध्दगिरी एवं कन्हेरी मठ
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कोल्हापूर के नजदीक लगभग पंधरा किलोमीटर की दूरी पर ,निसर्ग के सानिध्य में ,पवित्र वातावरण में बसा है ,महादेवजी का एक अत्यंत जागृत स्थान…

सिध्दगिरी अर्थात कन्हेरी मठ।

जो भी यहांपर आता है वहां के पवित्र वातावरण से आनंदीत हो उठता है।

सचमुच में यहांपर अदृष्य काडसिध्देश्वर स्वामिजी ने धरती का स्वर्ग बनाया है।जी तोड और दिनरात मेहनत करके स्वामीजी ने अपने गुरू का सपना साकार किया है।

मैं एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार हुं।और जब कुछ कारणों से वहां पर गया था …
तो वहां का वातावरण देखकर मेरा मन प्रसन्न चित हुवा और स्वामिजी के और उनके सभी सेवकों के प्रति आदर तथा निष्पाप प्रेम उत्पन्न हुवा और दो शब्द लिखने के लिए मुझे प्रेरणा मिली।जिसमें वहां के स्वर्गीय वातावरण का और आनंददायी वातावरण का सभी को अनुभव हो सके।

सबसे पहले मैं वहां के संन्माननीय श्री विक्रम पाटिल जी का तथा डाँक्टर सचिन पाटिल जी का और वहां के संपूर्ण टीम का दिल से आभार व्यक्त करता हुं।जिन्होंने मुझे एक पवित्र तथा स्वर्गीय प्रेम दिया।और एक अनुशासन प्रिय समाज निर्माण की और वैश्विक कार्य को गती देने की प्रेरणा दी।

संपूर्ण पृथ्वी तल पर ऐसा ही पवित्र, आनंददायी ,शुध्द वातावरण हो और सभी को आरोग्य तथा मन:स्वास्थ्य मिले इसीलिए मेरा भी यह प्रयास रहेगा की,विश्व के कोने कोने में ऐसा ही कन्हेरी मठ जैसा पवित्र वातावरण एवं माहौल हो।और इसी कार्यों द्वारा ईश्वरी संविधान की संपूर्ण पृथ्वी पर पुनर्स्थापना हो।

वैसे आज लगभग संपूर्ण पृथ्वी की स्थिति बिल्कुल नारकीय जैसी बनी हुई है।और अधर्म का भयंकर प्रभाव सभी को भुगतना पड रहा है।ऐसी भयंकर स्थिति में हर एक आदमी आत्मशांति तथा सुयोग्य आरोग्य सुविधा के लिए तडप रहा है,तरस रहा है।और चारों तरफ की लुटमार तथा नारकीय स्थिति से परेशान होकर अंदर ही अंदर वह परेशान भी हो रहा है,और उसका अंदर ही अंदर दम भी घुट रहा है।

वैसे तो विक्रम पाटिल जी ने मुझे पंचकर्म के लिए सहायता की और सचिन पाटिल डाँक्टर और उनका पूरा आयुर्वेदिक स्टाफ जो आत्मा से हर एक पेशंट की सेवा करता आया है।उन सभी का सप्रेम आभारी हूं।

जब मैं पंचकर्म के लिए वहां पर एडमिट हुवा और दस दिन में मैंने वहां पर उच्च कोटि का अनुभव महसूस किया वह सचमुच में अवर्णीय है,शब्दातीत है।

वहां की एक आदर्श आयुर्वेदिक उपचार पध्दति, वहां का आहार विहार, निसर्ग का सानिध्य और मंदगति से बजता हुवा म्युझिकल थेरपी का प्रभाव।
पंचकर्म करनेवाला संपूर्ण स्टाफ।संध्यासमय में दळवी जी द्वारा बनाया गया एक शुध्द आध्यात्मिक वातावरण।सुर्योपासना द्वारा अग्नीहोत्र का प्रभाव।

सचमुच में ऐसे भयंकर जागतीक कलह की स्थिति के समय में काडसिध्देश्वर मठ अथवा सिध्दगिरी कन्हेरी मठ आत्मा को शांति प्रदान करता है।और हर इंन्सान को इंन्सान बनकर जिने की निरंतर प्रेरणा देता है।मनुष्य को मनुष्य बनाता है।
सभी धर्मियोंके लिए यहांपर भेदभाव रहीत वातावरण में एक नवजीवन जिने की प्रेरणा मिलती है तथा जीवन के प्रती एक व्यापक तथा उदात्त भाव निर्माण होता है।

सुंदर बगीचा,गणेश मंदिर, धन्वंतरी का सुंदर एवं आकर्षक पुतला ,सर्वसमावेशी एलोपैथिक होस्पिटल,ऐसे पवित्र वातावरण में निश्चित रूप से सभी की आत्मचेतना जागृत हो उठती है।और मनुष्य प्राणी को सचमुच में मनुष्य जन्म का उद्देश्य क्या है और किस प्रकार से जीना चाहिए,इसकी एक आदर्श प्रेरणा मिलती है।

मैं भी दिनरात यही प्रयास में लगा हुवा हुं की,ऐसा ही एक उच्च कोटी का आदर्श तथा उच्च कोटी की सभ्य भारतीय संस्कृती विश्व के कोने कोने में पहुंचे।
और इसके लिए मुझे अदृष्य काडसिध्देश्वर स्वामिजी का संपूर्ण सहयोग तथा प्रेम प्राप्त होगा ऐसी आशा करता हुं।

अतीशयव्यस्त था इसीलिए लेख लिखने के लिए लगभग देढ महीने के बाद ही लेख लिखने का छोटासा प्रयास कर रहा हुं।इच्छा इतनी ही है की,संपूर्ण पृथ्वी का ऐसा ही सुंदर एवं पवित्र माहौल बने।

इसपर एक किताब लिखकर स्वामीजी के आदर्श कार्यों को विश्वव्यापक बनाने की इच्छा व्यक्त करता हुं।विश्व के सभी भाषाओं में किताब प्रकाशित होगी तो विश्व स्तर पर एक उच्च कोटी का आदर्श प्रस्थापित करने में सहायता होगी।

मेरे छोटेसे गांव में जो उस्मानाबाद ( धाराशीव ) में आता है,वहां पर भी एक ऐसा ही आदर्श बनाने की मैं दिनरात कोशिश में लगा रहा हुं।

मेरे दादाजी तथा मेरे सद्गुरु जिन्होंने मुझे देहतत्व में होकर भी और देहतत्व छोडने के बाद भी नितदिन, निरंतर, चौबीसों घंटे, विविध माध्यमों द्वारा प्रेरित किया, सदोदित प्रोत्साहित किया,उन्हीं के नाम से…
श्री विश्वनाथ ( आण्णा ) महाजन जी के नाम से आरंभ करना चाहता हुं।
ताकि मेरे गांव का और आसपास के सभी गांवों के हर एक व्यक्ति को आरोग्य तथा संपन्नता मिले इसके लिए मैं निरंतर प्रयास कर रहा हुं।

सद्गुरु आण्णा की कृपा से मुझे अनेक देवीदेवताओं के,सिध्दपुरूषों के आशीर्वाद, वरदहस्त तथा दर्शन हो गये है।मेरे आण्णा ने ही मुझे ब्रम्हज्ञान की प्राप्ति करवाई है।

और आगे का संपूर्ण कार्य सफल बनाने में भी मुझे मेरे आण्णा जरूर आशिर्वाद देंगे,सहयोग भी करेंगे ,मार्गदर्शन भी करेंगे और संपूर्ण यश भी देंगे ऐसा विश्वास है।जो मुझे विश्व परीवर्तन के लिए अपेक्षीत है।

मेरे सद्गुरु आण्णा हमेशा मुझे यही कहते थे की,
ध्रुव बाळ जैसा मैं तुझे अजरामर बनाना चाहता हुं।और इसके लिए मेरे निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।
मेरे सद्गुरु आण्णा का यह सपना मैं जरूर पूरा करके ही दिखाऊंगा।
हरी ओम्
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विनोदकुमार महाजन

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